एमबीए छात्र ने की आत्महत्या, मचा कोहराम

सुबह मां ने गेंहू के ड्रम से लटका मिला बेटा, घर में पसरा मातम

खबरों की दुनिया, हल्द्वानी

एक हंसता-खेलता घर पलभर में सन्नाटे में बदल गया, जब एक मां की आंखों के सामने उसका जवान बेटा हमेशा के लिए खामोश हो गया। सोमवार की रात जो बेटा मां और बहन के साथ हंसी-खुशी खाना खाकर अपने कमरे में सोने गया था, वही बेटा मंगलवार की सुबह फंदे से झूलता मिला।

मुखानी क्षेत्र के गिरिजा विहार फेज-6, कमलुवागांजा निवासी 22 वर्षीय दिनेश माहरा, जो एमबीए द्वितीय सेमेस्टर का छात्र था, ने आत्महत्या कर ली। उसके पिता गंगा सिंह माहरा असम राइफल्स में लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर दीमापुर में तैनात हैं, जबकि दिनेश अपनी मां कुसुम माहरा और बहन के साथ घर पर रह रहा था।

बताया जाता है कि सोमवार रात करीब 9 बजे मां ने बेटे को फोन कर नीचे खाने के लिए बुलाया था। रोज की तरह उसने मां और बहन के साथ बैठकर खाना खाया, कुछ बातें कीं और फिर अपने कमरे में चला गया। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि यह साथ बिताया गया वह आखिरी भोजन होगा। सुबह जब मां बेटे को जगाने के लिए उसके कमरे की ओर बढ़ी, तो सामने का दृश्य देख उसकी दुनिया ही उजड़ गई। सीढ़ियों के ऊपर रखे गेंहू के नीले ड्रम से रस्सी के सहारे उसका बेटा लटका हुआ था। यह दृश्य देख मां की चीख भी गले में ही अटक गई और पूरा घर मातम में डूब गया।

आनन-फानन में परिजन और पड़ोसी उसे नीचे उतारकर अस्पताल ले गए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस की प्रारंभिक जांच में पारिवारिक तनाव की बात सामने आ रही है। पंचनामे के दौरान दिनेश की कलाई पर कटे के निशान भी मिले, जिससे अंदेशा जताया जा रहा है कि उसने पहले खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की होगी, लेकिन जब उसमें सफल नहीं हुआ तो यह भयावह कदम उठा लिया। एक होनहार छात्र, एक मां की उम्मीद, और एक परिवार का सहारा—सब कुछ एक पल में खत्म हो गया। पीछे रह गईं तो बस यादें, सवाल और एक ऐसा दर्द, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।

Harish Upreti Karan

पिछले 20 वर्षों से दैनिक जागरण, हिंदुस्तान व अमृत विचार में पत्रकार के रूप में कार्य करने के अलावा चार काव्य संग्रह प्रकाशित, आकाशवाणी रामपुर व अल्मोड़ा से विभिन्न रचनाओं का प्रसारण, हिंदी फिल्म "यंग बाइकर्स" के लिए गीत लेखन, पर्यटन विभाग के लिए बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म "चंपावत एक धरोहर" की स्क्रिप्ट राइटिंग, कुमाऊनी फिल्म "फौजी बाबू", "पधानी लाली", रंगमंच के विभिन्न नाटकों में अभिनय, कुमाऊनी गीत "पहाड़ छोड़ दे" और "काली जींस" का लेखन व गायन, फिल्म राइटर्स एसोसिएशन मुंबई का सदस्य

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