
खबरों की दुनिया, हल्द्वानी
जब तिरंगे की आन-बान-शान के लिए समर्पित एक सैनिक अपने घर लौटता है, तो पूरा इलाका उत्सव में डूब जाता है। भारतीय सेना में 24 वर्ष और 1 माह की गौरवशाली व अनुशासित सेवा पूरी कर एसीपी नायब सूबेदार गणेश दत्त भट्ट जब अपने गृह क्षेत्र दुर्गा पालपुर मोतीराम (पेशकारपुर) पहुंचे, तो नजारा देखने लायक था। ढोल-नगाड़ों की थाप, जयघोष और फूलों की बारिश के बीच हल्दूचौड़ ने अपने हीरो का पलक-पावड़े बिछाकर स्वागत किया।रानीखेत से शुरू हुआ सफर, सीमाओं पर लिखी वीरता की इबारत : गोविन्द बल्लभ भट्ट के सुपुत्र गणेश दत्त भट्ट के सैन्य जीवन का सफर 2 जनवरी 2002 को कुमाऊं एवं नागा रेजिमेंट सेंटर, रानीखेत से शुरू हुआ था। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने 5 कुमाऊं रेजिमेंट में अपनी सेवाएं दीं। उनका करियर शौर्य की उन कहानियों से भरा है, जो दुर्गम पहाड़ियों और तपते रेगिस्तानों में लिखी गईं। जम्मू-कश्मीर की बर्फीली चोटियों से लेकर अरुणाचल और नागालैंड के घने जंगलों तक उन्होंने मां भारती की सेवा की। वे ”ऑपरेशन पराक्रम”, ”ऑपरेशन फाल्कन” और ”ओपी चौकस” जैसे महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों का हिस्सा रहे। उन्हें वर्ष 2023 में उनकी उत्कृष्ट सेवा के लिए उन्हें दक्षिण-पश्चिम कमान के जीओसी-इन-सी प्रशंसा पत्र से नवाजा गया।
अग्निवीरों को तराशने के बाद अब समाज को देंगे दिशा
सेवानिवृत्ति से पहले वे कुमाऊं रेजिमेंट सेंटर में अग्निवीरों के इंस्ट्रक्टर (प्रशिक्षक) के रूप में नई पौध को तैयार कर रहे थे। घर वापसी पर भावुक होते हुए गणेश दत्त भट्ट ने कहा कि सेना में सेवा करना मेरे लिए केवल नौकरी नहीं, बल्कि जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य था। वर्दी भले ही उतर गई हो, लेकिन राष्ट्रभक्ति का जज्बा हमेशा कायम रहेगा। अब मेरा लक्ष्य क्षेत्र के युवाओं को सेना में भर्ती के लिए मार्गदर्शन देना है।
गांव में उत्सव का माहौल : स्वागत समारोह में ग्राम प्रधान, पूर्व सैनिक और बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए। वक्ताओं ने गणेश दत्त भट्ट के जीवन को त्याग और अनुशासन का जीवंत उदाहरण बताया। ग्रामीणों ने उनके उज्ज्वल भविष्य और दीर्घायु की कामना करते हुए उन्हें स्मृति चिह्न भेंट किए।


